बच्चे के दिल में छेद: जेनेसिस फाउंडेशन कैसे दे रहा है नई उम्मीद? - Blog

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बच्चे के दिल में छेद: जेनेसिस फाउंडेशन कैसे दे रहा है नई उम्मीद?

July 1, 2026 | Contributed by Rahul Ray

बच्चे के दिल में छेद: जेनेसिस फाउंडेशन कैसे दे रहा है नई उम्मीद?

भारत में हर साल हजारों बच्चे जन्म से ही हृदय संबंधी समस्याओं के साथ दुनिया में आते हैं। इन्हें चिकित्सा भाषा में जन्मजात हृदय रोग कहा जाता है। यह स्थिति उतनी डरावनी लगती है, जितना सुनाई देता है, लेकिन सही समय पर इलाज हो तो बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

तकलीफ की बात यह है कि भारत में लाखों परिवार ऐसे हैं जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों का इलाज नहीं करवा पाते। ऐसी स्थिति में कुछ ऐसे संगठन होते हैं जो एक उम्मीद की

किरण बनकर सामने आते हैं। उनमें से एक प्रमुख नाम है जेनेसिस फाउंडेशन

जेनेसिस फाउंडेशन के बारे में जानने से पहले हम जन्मजात हृदय रोग क्या होता है, पहले इसे समझने की कोशिश करते हैं:-

  • आगे हम समझेंगे की दिल में छेद क्या होता है?
  • इसके लक्षण क्या होता हैं?
  • जन्मजात हृदय रोग का इलाज कैसे संभव है?
  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की चुनौतियाँ
  • कैसे जेनेसिस फाउंडेशन इन बच्चों के लिए जीवन का दूसरा मौका बन रहा है?

बच्चे के दिल में छेद

हृदय चार कक्षों से मिलकर बना होता है। दो ऊपरी जिसे एट्रिअल बोलते है और दो नीचे जिसे वेंट्रिकल बोलते है । सामान्य स्थिति में इन कक्षों के बीच दीवार होती है, जो खून के सही प्रवाह को सुनिश्चित करता है।

जब इस दीवार में कहीं छेद होता है, तो खून का प्रवाह बिगड़ जाता है। यह स्थिति दो प्रकार की होती है:

  1. एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट – ऊपरी कक्षों के बीच छेद
  2. वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट – निचले कक्षों के बीच छेद

यह समस्या जन्म से ही होती है और बच्चे के विकास को प्रभावित करता है।

बच्चे के दिल में छेद के लक्षण

कुछ बच्चों को शुरू में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, समस्याएँ सामने आने लगती हैं  जैसे की:-

  • सांस लेने में तकलीफ
  • जल्दी थक जाना
  • वजन न बढ़ना
  • बार-बार सर्दी-खांसी और बुखार होना
  • नाख़ून और होठ का नीला पड़ना
  • माँ का स्तनपान करते समय पसीना आना और रुक रुक दूध पीना
  • स्तनपान करते समय सांस लेने में तकलीफ होना
  • दिल का तेज धड़कना

कई बार ये लक्षण इतने हल्के होते हैं कि परिवार इन्हें नजरअंदाज कर देता है, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।

जन्मजात हृदय रोग का इलाज कैसे संभव है ?

जन्मजात हृदय रोग का इलाज निम्न प्रकार से संभव है-

  1. दवाइयों से– हल्के मामलों में डॉक्टर शुरुआत में दवाइयों से बच्चे के हृदय को ठीक करने की कोशिश करते है
  2. कैथेटर प्रक्रिया– कुछ मामलों में बिना ओपन हार्ट सर्जरी के, कैथेटर के जरिए जन्मजात हृदय दोष का इलाज किया जाता है।
  3. ओपन हार्ट सर्जरी – गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत होती है। यह थोड़ी महंगी होती है और कई परिवारों के लिए असंभव होता है इलाज करवाने में।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की चुनौतियाँ –

भारत में एक ओपन हार्ट सर्जरी का खर्च 2 लाख से 4 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है। इतने रुपये एक गरीब परिवार के लिए भारी होता है, जिसके वजह से इलाज करवाना उनके लिए असंभव होता है।

गाँवों और छोटे शहरों में रहने वाले परिवारों को और समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे की –

  • सही जानकारी न होना
  • अच्छे अस्पतालों तक पहुंच नहीं हो पाती
  • यात्रा और रहने का खर्च
  • काम छोड़कर बच्चे के जन्मजात हृदय रोग का इलाज के लिए देखभाल

ऐसे में कई बच्चे जन्मजात हृदय रोग का इलाज के बिना ही जिंदगी से हार जाते है।

कैसे जेनेसिस फाउंडेशन इन बच्चों के लिए जीवन का दूसरा मौका बन रहा है?

जेनेसिस फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को जन्मजात हृदय रोग की सर्जरी के लिए मदद करता है। जेनेसिस फाउंडेशन उन बच्चों के लिए काम करती है जिनकी उम्र 0 से 18 वर्ष तक होती है और जिन्हें जन्मजात हृदय रोग की सर्जरी की जरूरत होती है।

कैसे काम करता है जेनेसिस फाउंडेशन?

  1. केस की पहचान – अस्पतालों, डॉक्टरों और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से बच्चों की पहचान होती है
  2. मेडिकल जांच- विशेषज्ञ डॉक्टर बच्चे की स्थिति का मूल्यांकन करते हैं
  3. वित्तीय सहायता-जरूरतमंद परिवारों को सर्जरी के लिए फंड उपलब्ध कराया जाता है
  4. अस्पतालों के साथ साझेदारी – देश के प्रमुख अस्पतालों के साथ साझेदारी करके बच्चे की सर्जरी करवाई जाती है

फाउंडेशन की खास पहलें

  1. सेव लिटिल हार्ट” – यह कार्यक्रम बच्चों को जन्मजात हृदय रोग की सर्जरी के लिए वित्तीय सहायता देने पर केंद्रित है।
  2. पारदर्शिता और विश्वसनीयता –
  • हर केस की पूरी जांच होती है
  • सहायता सीधे अस्पताल को दी जाती है
  • दान दाताओं को रिपोर्ट दी जाती है
  1. सामुदायिक जागरूकता-

स्क्रीनिंग कैंप, सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाता है। जेनेसिस फाउंडेशन के बारे में अधिक जाने के लिए https://www.genesis-foundation.net/  पर विजिट कर सकते हैं।

जेनेसिस फाउंडेशन ने अब तक 5 हज़ार से ज्यादा बच्चों की सर्जरी करवा चुके है और आगे ऐसे ही अपने काम के लिए तत्पर है।

हर दिल को जीने का अधिकार

बच्चे के दिल में छेद: जेनेसिस फाउंडेशन कैसे दे रहा है नई उम्मीद?

बच्चे का दिल सिर्फ एक अंग नहीं होता है, यह उसकी जिंदगी, सपनों और भविष्य का केंद्र होता है। बच्चे के दिल में छेद जैसी समस्या सुनने में भले ही गंभीर लगे, लेकिन सही इलाज और समय पर मदद से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

जहाँ एक तरफ गरीबी, बच्चों के सपनों को रोकती है, वहीं दूसरी तरफ जेनेसिस फाउंडेशन जैसे संगठन उन सपनों को उड़ान देते हैं। यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। आइए मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा जन्मजात हृदय रोग के इलाज से वंचित न रहे।

जेनेसिस फाउंडेशन पिछले पच्चीस वर्षों से नन्हे दिलों की मदद कर रहा है।यदि आप उन्हें संपर्क करना चाहते हैं तो इस नंबर पर कॉल करें:  +91 96506 03438 ।

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