हर बच्चे को मिले स्वस्थ दिल: एक नई शुरुआत की ओर
September 22, 2025 | Contributed by Rahul Ray

आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाते। इसी कारण हम अपने आस-पास हो रही गंभीर समस्याओं को भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उदाहरण के लिए, हर साल 2 लाख से अधिक बच्चे जन्म से ही हृदय रोग (जन्मजात हृदय दोष) से ग्रस्त होते हैं। सही समय पर इलाज न मिलने की वजह से ये बच्चे कई कठिनाइयों का सामना करते हैं, लेकिन शायद आप में से कई लोग इस बारे में पूरी तरह से जागरूक नहीं होंगे।
आइए, एक नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ाते हैं और जानते हैं कि अगर किसी बच्चे को जन्मजात हृदय दोष (न्यू बोर्न बेबी हार्ट होल) है तो उसके इलाज के लिए कब और क्या करना ज़रूरी है।
जन्म के तुरंत बाद हार्ट होल की पहचान
जब बच्चे के जन्म के तुरंत बाद डॉक्टर यह बताते हैं कि उसके दिल में छेद है, तो परिवार घबरा जाता है और सोचने लगता है कि आखिर यह समस्या क्यों हुई। चलिए जानते हैं गर्भावस्था के दौरान ऐसे कौन से जन्मजात ह्रदय रोग के कारण हो सकते हैं जिनसे बच्चे को जन्मजात हृदय दोष (न्यू बोर्न बेबी हार्ट होल) की समस्या हो सकती है:
- गर्भावस्था के दौरान मधुमेह (डायबिटीज़) का नियंत्रण न होना
- परिवार में हृदय से संबंधित समस्या का इतिहास होना
- गर्भावस्था के दौरान नशीले पदार्थों (शराब, धूम्रपान आदि) का सेवन करना
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन करना
इन जन्मजात ह्रदय रोग के कारण बच्चों के दिल में छेड़ हो सकता है।
जन्मजात हृदय दोष से बचाव के उपाय
- गर्भावस्था से पहले और दौरान मधुमेह को नियंत्रण में रखें
- गर्भावस्था के दौरान किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन न करें
- हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही दवाइयाँ लें
- यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो डॉक्टर को अवश्य बताएं
- गर्भावस्था के दौरान बच्चे के दिल की स्थिति जानने के लिए फीटल इकोकार्डियोग्राफी करवा सकते हैं। अगर इसमें न्यू बोर्न बेबी हार्ट होल का पता चलता है, तो समय रहते इलाज की योजना बनाई जा सकती है।
जन्मजात हृदय दोष के लक्षण और इलाज
0 से 1 वर्ष के बच्चों में लक्षण:
- वजन न बढ़ना
- दूध पीते समय तेज़ सांस लेना और माथे पर पसीना आना
- शारीरिक विकास में कमी
- तेज़ धड़कन
- सांस लेने में कठिनाई
- होंठ और नाखून नीले पड़ना
- बार-बार सर्दी, खाँसी, बुखार या निमोनिया होना
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नज़दीकी पीडियाट्रिशन (बाल रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करें। वे आवश्यक जाँच करने के बाद बच्चे को कार्डियक पीडियाट्रिशन के पास भेज सकते हैं। इकोकार्डियोग्राफी, एक्स-रे और ईसीजी के माध्यम से डॉक्टर बच्चे की स्थिति समझते हैं।
यदि समस्या दवाइयों से ठीक हो सकती है तो उपचार दवाइयों से किया जाता है। गंभीर स्थिति में सर्जरी की सलाह दी जाती है।
सर्जरी के प्रकार:
- मिनिमल इनवेसिव सर्जरी: इसमें हार्ट को ओपन नहीं किया जाता, बल्कि कैथेटर के माध्यम से इलाज किया जाता है। इसमें दर्द कम होता है और बच्चा जल्दी ठीक हो जाता है।
- इनवेसिव सर्जरी: इसमें हार्ट को ओपन कर ऑपरेशन किया जाता है। इसमें थोड़ा अधिक समय और रिकवरी की आवश्यकता होती है।
1 साल से अधिक उम्र के बच्चों में लक्षण:
- बार-बार सर्दी, खाँसी, बुखार या निमोनिया होना
- वजन और विकास का रुक जाना
- सांस लेने में परेशानी
- भूख कम लगना
- दिल की धड़कन तेज़ होना
- होंठ और नाखून नीले पड़ना
- खेलते या चलते समय जल्दी थक जाना और लंबी सांस लेना
कभी-कभी ये लक्षण बचपन में स्पष्ट नहीं दिखते, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ नज़र आने लगते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

जन्मजात हृदय दोष से सम्बंधित कोई भी सवाल हो तो आप हमें इस नंबर 9650603438 पर कॉल कर सकते है या फिर हमारे वेबसाइट https://www.genesis-foundation.net/ पर visit कर सकते है । जेनेसिस फाउंडेशन 0-18 उम्र के बच्चों की मदद करते हैं जिनके दिल में छेड़ होता है । इन् बच्चों का इलाज हम अपने पार्टनर हॉस्पिटल में करवाते हैं। हम स्क्रीनिंग कैम्प्स भी आयोजित करवाते है जिसके द्वारा जन्मजात ह्रदय रोग का जल्दी और समय पर पता चल सकता है।
