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बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की शुरुआती पहचान: स्क्रीनिंग कैंप का महत्व

November 19, 2025 | Contributed by Shivam Gupta

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की शुरुआती पहचान

जन्मजात हृदय रोग एक ऐसी स्थिति है, जो जन्म से ही बच्चे में पाई जाती है। आइये जानते है की जन्मजात हृदय रोग की पहचान कैसे करते है । जन्मजात ह्रदय रोग के कारण कुछ इस प्रकार हैं

  • गर्भावस्था के दौरान कोई भी किसी भी प्रकार का संक्रमाद
  • गरभवष्ठ में संक्रमाद होने से बच्चे के विकास पर असर पद सकता है
  • गरभवष्ठ के दौरान दिअबितेस होना
  • कई मामलो में सटीक कारण नहीं मिलता है।

हमे न्यू बोर्न बेबी हार्ट होल के लक्षणों को भी जानना चाहिए-

न्यू बोर्न बेबी हार्ट होल के लक्षण:

  • बार बार सर्दी जुखाम, बुखार और निमोनिया होना
  • वजन न बढ़ना और बच्चे का वजन कम होना
  • सांस लेने में समस्या होना
  • भूख न लगना
  • दिल के धड़कन का तेज होना
  • बच्चे के होठ और नाखुनो का नीला होना
  • चलते वक़्त, दौड़ते वक़्त और खेलते वक़्त जल्दी थक जान और लम्बी लम्बी सांस लेना
  • बच्चे का शारीरिक ग्रोथ न बढ़ना

यह हृदय रोग के लक्षण का संकेत हो सकता है । फिर हम डॉक्टर की सलाह के साथ बच्चे का ट्रीटमेंट करते है और डॉक्टर बच्चे की जांच करते है और यदि उन्हें शक होता है की बच्चे को जन्मजात हृदय रोग है या हो सकता है फिर वह इको करने की सलाह देते है फिर रिपोर्ट से पता चलता है की वास्तव में बच्चे को जन्मजात हृदय रोग है या नहीं।

जन्मजात हृदय रोग स्क्रीनिंग

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की शुरुआती पहचान

जब बच्चो को स्कूल या समुदाय में जन्मजात हृदय रोग स्क्रीनिंग स्क्रीनिंग कैंप होता है तब डॉक्टर बच्चे की जांच करते है यदि किसी बच्चे में हृदय रोग के लक्षण या कुछ शक होता है तब डॉक्टर उसे आगे की जांच और ट्रीटमेंट के लिए भेजते है । यदि बच्चे की इको में पता चलता है की बच्चे के दिल में छेद है या कोई और समस्या है तब रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर दवा या सर्जरी की सलाह देते है।

स्क्रीनिंग कैंप बहुत जरुरी होता है क्युकी इनके माध्यम से ऐसे बच्चे खोजे जा सकते है जिन्हे जन्मजात हृदय रोग है लेकिन कभी बचे के परिवार को यह बहुत देर में या पता नहीं चलता है ।अगर बच्चे को जन्मजात हृदय रोग स्क्रीनिंग कैंप के दौरान आता है तो फिर चेक करने के बाद हम उस बच्चे को मेडिकेशन या फिर डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते है और जब स्कूल में या कम्युनिटी में स्क्रीनिंग कैंप होते है जब भी डॉक्टर चेक करते है अगर कोई बच्चे पाए जाते है तो फिर डॉक्टर की सलाह से बच्चे का ट्रीटमेंट करते है।

जन्मजात हृदय रोग की स्क्रीनिंग कम्युनिटी एंड स्कूल के अंदर डॉक्टर स्क्रीन करते है की किसी भी बच्चे को जन्मजात हृदय रोग तो नहीं है । और अगर है तो उसका आगे का ट्रीटमेंट होता है जन्मजात हृदय रोग स्क्रीनिंग के बाद पता चलता है की ये ऐसे बच्चे है जिनको हृदय जन्मजात रोग है और इन बच्चो को टेस्ट किया जाता है । अगर बच्चे के दिल में छेद है तो फिर टेस्ट के अनुसार फिर बच्चे को ट्रीटमेंट दिआ जाता है और फिर फाइनल करते है की बच्चे का क्या ट्रीटमेंट की जरुरत है उसके हिसाब से उस बच्चे का ट्रीटमेंट करते है।

निष्कर्ष

जन्मजात हृदय रोग स्क्रीनिंग कैंप का सबसे ज्यादा महत्त्व होता है जिससे बच्चो को खोज सकते है जिन बच्चो को जन्मजात हृदय रोग है तो उसके बाद फिर उन बच्चो का ट्रीटमेंट करते है अगर स्क्रीनिंग कैंप नहीं होता है तो बच्चो का नहीं पता चल पता है की बच्चो को हृदय जन्मजात रोग है या नहीं। जेनेसिस फाउंडेशन ऐसी जगह पर स्क्रीनिंग कैम्प्स करवाता जहाँ मेडिकल फैसिलिटीज कम होती हैं । जिन भी बच्चों का स्क्रीनिंग कैंप के ज़रिये दिल में छेड़ निकलता है उनका हम इलाज करते हैं । जन्मजात हृदय दोष से सम्बंधित कोई भी सवाल हो तो आप हमें इस नंबर 9650603438 पर कॉल कर सकते है या फिर हमारे वेबसाइट https://www.genesis-foundation.net/ पर visit कर सकते है।

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