जन्मजात हृदय दोष के साथ जीने का मतलब – एक बहादुर की कहानी - Blog

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जन्मजात हृदय दोष के साथ जीने का मतलब – एक बहादुर की कहानी

February 2, 2024 | Contributed by Rahul Ray

जिन बच्चों को जन्मजात हृदय दोष होता है उन बच्चों का विकास ठीक से नहीं हो पाता। अगर जन्मजात हृदय दोष का इलाज सही समय पर नहीं कराया जाए तो या तो बच्चे को दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों का सामना करना पड़ता है और कुछ मामलों में मृत्यु हो जाती है । इस्लिये, बच्चों के दिल में छेद के लक्षण और इलाज समझना जरूरी है ।

आइए हम समझते है जन्मजात हृदय दोष के साथ जीने का क्या मतलब होता है और किस प्रकार से जीवन पर असर पड़ता हैं :-

बच्चों के दिल में छेद के लक्षण और इलाज समझना जरूरी है

आज से कुछ साल पहले एक लड़के का जन्म हुआ जो की जन्मजात हृदय दोष के साथ इस दुनिया में आया। परिवार को बहुत खुशी थी क्योंकि ये उनका पहला बच्चा है। परिवार वाले इस बात से अनजान थे की उनके बच्चे को जन्मजात हृदय दोष है। बच्चे के पिता अपने घर को चलाने के मजदूरी करते है। बच्चा जब कुछ दिन का हुआ और मां

अपने बच्चे को दूध पिला रही थी। तब बच्चे के सिर पर पसीना आने लगा। ये दिल में छेद होने के लक्षण  था, उन्हें पता नहीं था ।  धीर – धीरे बच्चे को सर्दी-जुखाम, बुखार, निमोनिया होने लगा। उस समय बच्चे के पिता ने बच्चे को अपने गांव के डॉक्टर से दिखाया। बच्चा दवाई खाता और ठीक हो जाता। कुछ महीने तक ऐसे ही चलता रहा। बच्चा बार-बार बीमार होता रहा और परिवार वाले डॉक्टर को दिखाते रहे।

देखते ही देखते बच्चा 2 साल से उपर का हो गया। लेकिन 2 साल होने के बाद भी वो चल नहीं सकता था । तब गांव के लोगो ने कहा की बच्चे को कुछ हेल्दी चीज खिलाओ ताकि बच्चे का हाथ पैर मजबूत हो सके। परिवार वाले से खूब कोशिश किया। लेकिन बच्चे का हाथ पैर मजबूत नहीं हुआ और न ही उसका वजह बढ़ा। परिवार वाले सब दुखी थे क्योंकि उनका ये पहला बच्चा था और उसकी इतनी सारी परेशानी को झेलना पड़ रहा था। माँ बाप को बच्चों के दिल में छेद के लक्षण और इलाज के बारे में कुछ पता नहीं था ।

जन्मजात हृदय दोष का इलाज आज के युग में संभव है

देखते ही देखते बच्चे की  उम्र 4 साल से उपर हो गई और वो अपने पैरो के उपर खड़ा भी नहीं हो सकता था। एक छोटे बच्चे की तरह बिस्तर पर सोया रहता था। बच्चे के मां ने इलाज करवाने के लिए अपने गांव से बाहर राज्य के सभी बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने का फैसला लिया। परिवार के सभी सदस्य राज़ी हो गए और बच्चे के इलाज के पैसे के लिए दिन रात सब ने मेहनत किया और गांव से बाहर जिला के सबसे बड़े अस्पताल में बच्चे का इलाज करवाने के लिए चले गए।

परिवार वाले जब पीडियाट्रिक कार्डिक डॉक्टर के पास गए तब डॉक्टर ने बच्चे का हालत देख कर तुरंत बच्चे का ईको करवाने के लिए बोल दिया। ईको करवाने के रिपोर्ट में बच्चे के दिल में छेद पाया गया। बच्चे का विकास ना होना दिल में छेद होने के लक्षण । डॉक्टर ने परिवार वालों को दूसरे अस्पताल में जाने को कहा। परिवार वालो बहुत उदास हो गए। उसके कुछ दिन के बाद बच्चे के मां ने राज्य के सभी बड़े हॉस्पिटल में बच्चे को दिखाया और सभी डॉक्टर ने सिर्फ एक ही बात बोला की बच्चे का इलाज यहां मुश्किल है। बच्चे के मां ने थक हार कर, हॉस्पिटल जाना बंद कर दिया। बच्चे के प्रॉब्लम को कंट्रोल करने के लिए दवा देते रहे। कुछ सालो के बाद बच्चा 9 साल का हो गया और अभी भी वो अपने पैरों के उपर खड़ा भी नहीं हो सकता था। उसको ग्रोथ न के बराबर था। किसी ने बच्चे के मां को बताया की हैदराबाद में बच्चे के दिल का इलाज बहुत अच्छा होता है। ये बात सुनकर बच्चे के पिता ने गांव वालो से पैसे उधार लिए और हैदराबाद चले गए। वहा जाकर हॉस्पिटल में बच्चे का चेक-अप करवाया। डॉक्टर ने बच्चे का चेक-अप किया और परिवार को बोला की बच्चे का सर्जरी करना पाएगा और खर्चा लाखो में बताया। ये बात सुन कर परिवार वालो घबरा गए। क्योंकि खर्चा लाखो में था। बच्चे के पिता हैदराबाद से घर आ गए। बच्चे की कंडिशन धीरे धीरे और बिगड़ने लगा।

आशा की किरण 

गांव के किसी व्यक्ति ने बताया की गुजरात के अहमदाबाद में निशुल्क कैंप लगा है और दिल के सभी बीमारियों का इलाज करते है। परिवार वाले अगले दिन बच्चे को गोद में उठा के अहमदाबाद के लिए निकल गए। वहा पर बच्चे के सभी मेडिकल रिपोर्ट देखा गया और कुछ जांच भी किया गया। डॉक्टर ने सांतवाना दिया कि बिहार के अस्पताल में इलाज करवाएंगे।पर परिवार वाले इलाज के खर्चे को लेकर चिंतित थे। डॉक्टर ने उन्हें जेनेसिस फाउंडेशन के बारे में बताया। उस समय बच्चे की उम्र 10 साल की हो गई थी।

जब बच्चे का सर्जरी हो गया और वो होश में आया तो, बच्चे की मां  खुशी के मारे फुले नहीं समा रही थी। परिवार वालो ने डॉक्टर और जेनिसिस फाउन्डेशन को शक्रियादा किया और खूब सारी दुआएं और आशीर्वाद दिया। सर्जरी के कुछ महीनो के बाद बच्चा अपने पैरो में खड़ा होना शुरू कर दिया और उसका ग्रोथ धीरे धीरे बढ़ाने लगा।

जन्मजात हृदय दोष एक बीमारी है जिसका इलाज आज के युग में संभव है। समय रहते अगर आप दिल में छेद के लक्षण और इलाज समझेंगे और जरूरी कदम उठाएंगे तो बच्चा ठीक हो सकता है। जन्मजात हृदय दोष का इलाज न करवाने पर आपको इस प्रकार की परेशानियों को जिंदगी भर ले कर जीना पड़ेगा।

स्वस्थ रहे , मस्त रहे और दिल की सुने

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